Diwali 2026: दिवाली कब है? जानें तारीख, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, पूजा विधि और दीपावली का महत्व
Diwali 2026: दीपावली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इसे रोशनी, खुशियों, समृद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। दिवाली के दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है और परिवार के लोग मिलकर इस पर्व को मनाते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि Diwali 2026 kab hai, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और दिवाली पर पूजा कैसे करें, तो इस लेख में आपको पूरी जानकारी मिलेगी।
Diwali 2026 Date: दिवाली 2026 कब है?
साल 2026 में दिवाली का त्योहार रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की पूजा करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली को दीपों के उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा प्रचलित है। हालांकि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में दिवाली से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और उत्सव मनाने के तरीके भी अलग-अलग हैं।
दिवाली 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
| त्योहार | तारीख | दिन |
|---|---|---|
| धनतेरस | 6 नवंबर 2026 | शुक्रवार |
| नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली | 8 नवंबर 2026 | रविवार |
| दीपावली / लक्ष्मी पूजा | 8 नवंबर 2026 | रविवार |
| गोवर्धन पूजा | 10 नवंबर 2026 | मंगलवार |
| भाई दूज | 11 नवंबर 2026 | बुधवार |
नोट: 2026 में कुछ त्योहारों की तिथियों का पंचांग के अनुसार विशेष संयोग है। विशेष रूप से छोटी दिवाली और मुख्य दीपावली की तिथि तथा गोवर्धन पूजा के दिन के लिए अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।
Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat: दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
दीपावली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा के लिए शुभ समय जानना महत्वपूर्ण है, ताकि परिवार के सदस्य निर्धारित समय में विधि-विधान से पूजा कर सकें।
दिल्ली में दिवाली 2026 पूजा का समय
- दिवाली की तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक
- वृषभ काल: शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
ये समय नई दिल्ली के लिए हैं। मुंबई, जयपुर, वाराणसी, लखनऊ, कोलकाता और अन्य शहरों में सूर्यास्त तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का मुहूर्त अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के अनुसार लक्ष्मी पूजा का समय जरूर जांचें।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। दिवाली की रात उनकी पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि मां लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख, शांति और आर्थिक समृद्धि बनी रहती है।
दिवाली के दिन भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के आरंभ का देवता माना जाता है। इसीलिए लक्ष्मी पूजा के दौरान मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। कई परिवारों में भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है।
दीपावली का आध्यात्मिक संदेश केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें अपने जीवन से अज्ञान, नकारात्मकता, अहंकार और बुरे विचारों को दूर करके ज्ञान, सदाचार और सकारात्मकता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
Diwali Puja Vidhi 2026: दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें?
दिवाली पर पूजा करने के लिए सबसे पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा के स्थान को फूलों, रंगोली और दीपकों से सजाएं। पूजा के दौरान श्रद्धा, स्वच्छता और शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
लक्ष्मी पूजा की पूरी विधि
- घर की सफाई करें: दिवाली से पहले घर के सभी कमरों, मुख्य द्वार और पूजा स्थल की सफाई करें। मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाएं।
- पूजा स्थल तैयार करें: एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और अन्य पूजनीय देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित करें।
- कलश स्थापना करें: पूजा स्थल पर जल से भरा कलश रखें। परंपरा के अनुसार कलश में आम के पत्ते और नारियल रखा जा सकता है।
- दीपक जलाएं: पूजा के समय घी या तेल का दीपक जलाएं। दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें।
- संकल्प लें: परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए पूजा का संकल्प लें।
- भगवान गणेश की पूजा करें: सबसे पहले भगवान गणेश को पुष्प, अक्षत, दूर्वा और मोदक या अन्य पसंदीदा भोग अर्पित करें।
- मां लक्ष्मी की पूजा करें: मां लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें।
- मां लक्ष्मी की आरती करें: परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी जी और गणेश जी की आरती करें।
- प्रसाद वितरित करें: पूजा के बाद सभी लोगों में प्रसाद बांटें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
- दीपक जलाएं: घर के मुख्य द्वार, आंगन और सुरक्षित स्थानों पर दीपक जलाकर दीपावली का उत्सव मनाएं।
पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। विस्तृत वैदिक पूजा के लिए किसी योग्य पुरोहित या अपने पारिवारिक पूजा-पाठ की परंपरा का पालन करें।
दिवाली पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
अगर आप दिवाली 2026 पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले से पूजा सामग्री तैयार रखना सुविधाजनक होता है।
- मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
- पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- रोली, कुमकुम और हल्दी
- अक्षत यानी साबुत चावल
- फूल और फूलों की माला
- पान और सुपारी
- धूप, अगरबत्ती और कपूर
- घी या तेल के दीपक और रुई की बाती
- फल, मिठाई और अन्य भोग सामग्री
- कलश, जल और नारियल
- गंगाजल, यदि उपलब्ध हो
- पंचामृत की सामग्री
- लक्ष्मी जी और गणेश जी की आरती की पुस्तक
- पूजा की थाली और घंटी
पूजा सामग्री की सूची आपके परिवार की परंपरा और पूजा की विधि के अनुसार बदल सकती है। सभी वस्तुओं का पहले से प्रबंध कर लेने से पूजा के समय अनावश्यक भागदौड़ नहीं होती।
Diwali 2026: दीपावली के पांच दिनों का महत्व
दीपावली का उत्सव सामान्यतः पांच दिनों तक चलता है। इस दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। हर दिन की अपनी धार्मिक मान्यता और परंपरा है।
1. धनतेरस 2026: 6 नवंबर
धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है।
धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन या अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं और धन, स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
2. छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस और छोटी दिवाली भी कहा जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इस घटना की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और दीपक जलाने की परंपरा है। कुछ क्षेत्रों में अभ्यंग स्नान और यम दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है।
3. दीपावली 2026: 8 नवंबर
दीपावली पांच दिवसीय उत्सव का सबसे प्रमुख दिन माना जाता है। इस दिन घरों को दीपकों, फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। शाम को शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
दीपावली परिवार के साथ समय बिताने, मिठाइयां बांटने, रिश्तों में प्रेम बढ़ाने और जीवन में सकारात्मकता लाने का भी अवसर है।
4. गोवर्धन पूजा 2026
गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को भारी वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था।
इस दिन गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर पूजा करने और भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाने की परंपरा है। कई स्थानों पर गायों की पूजा भी की जाती है।
5. भाई दूज 2026
भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का त्योहार है। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।
भाई दूज के अवसर पर भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और परिवार के लोग मिलकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं।
दिवाली क्यों मनाई जाती है? जानिए दीपावली की पौराणिक कथा
दीपावली मनाने के पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। उत्तर भारत में यह पर्व मुख्य रूप से भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के अयोध्या लौटने की खुशी से जुड़ा हुआ है।
रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ के वचन का पालन करते हुए 14 वर्षों का वनवास स्वीकार किया था। वनवास के दौरान माता सीता का रावण ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद भगवान श्रीराम ने वानर सेना की सहायता से रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराया।
वनवास की अवधि पूरी होने के बाद जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी अयोध्या लौटे, तब नगरवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। मान्यता है कि लोगों ने अपने घरों और गलियों में दीपक जलाकर पूरी अयोध्या को रोशन कर दिया था।
इसी प्रसंग की स्मृति में दीपावली पर दीप जलाने और भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद करने की परंपरा प्रचलित है। यह कथा हमें सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य के महत्व का संदेश देती है।
भारत के विभिन्न हिस्सों में दीपावली का धार्मिक महत्व अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है। पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य क्षेत्रों में इस दिन काली पूजा का विशेष महत्व है। जैन धर्म में दीपावली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस से जुड़ी है। सिख परंपरा में बंदी छोड़ दिवस भी इसी समय मनाया जाता है।
दिवाली पर घर की सजावट और रंगोली का महत्व
दिवाली के अवसर पर घरों की सजावट का विशेष महत्व है। लोग अपने घरों को साफ करके फूलों, बंदनवार, रंगोली और दीपकों से सजाते हैं। माना जाता है कि स्वच्छ और सुंदर घर सकारात्मकता तथा शुभता का प्रतीक है।
दिवाली की सजावट के आसान तरीके
- रंगोली बनाएं: घर के मुख्य द्वार पर रंगीन रंगोली बनाएं। आप फूलों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग भी कर सकते हैं।
- दीपक जलाएं: मिट्टी के दीयों से घर और आंगन को सजाएं। दीपकों को पर्दों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
- फूलों की सजावट: गेंदे और अन्य मौसमी फूलों की मालाओं से दरवाजे और पूजा स्थल को सजाएं।
- मुख्य द्वार सजाएं: सुंदर तोरण और पारंपरिक बंदनवार लगाएं।
- स्वच्छता बनाए रखें: सजावट के साथ-साथ घर को व्यवस्थित और साफ रखें।
दिवाली की सजावट में प्लास्टिक और अत्यधिक बिजली खर्च करने वाली वस्तुओं के स्थान पर पुनः उपयोग होने वाली सजावट और ऊर्जा-कुशल LED लाइट का चुनाव किया जा सकता है।
दिवाली पर क्या करें और किन बातों का ध्यान रखें?
दिवाली पर क्या करना शुभ माना जाता है?
- घर और पूजा स्थल की सफाई करें।
- परिवार के साथ मिलकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा करें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और भोजन या वस्त्र दान करें।
- बड़ों का आशीर्वाद लें और परिवार के सदस्यों के साथ खुशियां बांटें।
- मिट्टी के दीपक जलाकर पारंपरिक तरीके से त्योहार मनाएं।
- स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करें।
दिवाली पर किन बातों से बचें?
- पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने का प्रयास करें।
- बच्चों को पटाखे जलाते समय अकेला न छोड़ें।
- दीपक और मोमबत्तियों को ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें।
- बिजली की सजावट में खराब तारों और असुरक्षित कनेक्शन का इस्तेमाल न करें।
- त्योहार के दौरान भोजन की बर्बादी से बचें।
- दिवाली की खुशियों में पशुओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों की सुविधा का भी ध्यान रखें।
दिवाली पर पढ़े जाने वाले प्रमुख मंत्र
दिवाली के अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के लिए कई मंत्रों का जाप किया जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार इन मंत्रों का पाठ कर सकते हैं।
मां लक्ष्मी का मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
यह मां लक्ष्मी का प्रचलित मंत्र है। श्रद्धालु पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक इसका जाप करते हैं।
भगवान गणेश का मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः।
भगवान गणेश के इस मंत्र का जाप विघ्नों को दूर करने और शुभ कार्यों के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना से किया जाता है।
मां लक्ष्मी की आरती
दिवाली की पूजा में मां लक्ष्मी की आरती करना भी महत्वपूर्ण परंपरा है। परिवार के सदस्य एक साथ आरती करके सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
Diwali 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. दिवाली 2026 में कब है?
दिवाली 2026 में रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
2. दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा का प्रमुख मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक है। अन्य शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार समय अलग हो सकता है।
3. दिवाली 2026 में धनतेरस कब है?
धनतेरस 2026 में शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा और परंपरा के अनुसार खरीदारी की जाती है।
4. दिवाली पर किस भगवान की पूजा की जाती है?
दिवाली पर मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परिवारों में भगवान कुबेर की भी पूजा होती है।
5. दिवाली पर लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है?
मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। दिवाली पर उनकी पूजा करके भक्त सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
6. दिवाली 2026 में छोटी दिवाली कब है?
वर्ष 2026 में छोटी दिवाली और दीपावली की तिथियों का विशेष संयोग है। नरक चतुर्दशी की स्थानीय तिथि और पूजा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग की पुष्टि करें।
7. दिवाली पर कौन-सा दीपक जलाना चाहिए?
दिवाली पर मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा है। श्रद्धालु घी या तेल का दीपक अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार जला सकते हैं।
8. दिवाली का धार्मिक महत्व क्या है?
दीपावली को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी, मां लक्ष्मी की पूजा और विभिन्न क्षेत्रीय धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है।
निष्कर्ष: Diwali 2026 को बनाएं खुशियों और सकारात्मकता का त्योहार
दिवाली केवल दीपक जलाने और मिठाइयां बांटने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है। दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करके लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
इस दीपावली पर अपने घर को रोशनी से सजाने के साथ-साथ अपने जीवन में प्रेम, दया, सहयोग और सकारात्मकता का प्रकाश भी फैलाएं। सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तरीके से त्योहार मनाएं तथा जरूरतमंद लोगों के साथ अपनी खुशियां साझा करें।
DharamYatri की ओर से आप सभी को दीपावली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।