
लक्ष्मी पूजा 2026: दीपावली और शुक्रवार की पूजा विधि, मंत्र, शुभ मुहूर्त और महत्व
October 6, 2026
शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी? जानें तारीख, घटस्थापना मुहूर्त, नौ देवियों के नाम और पूजा विधि
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह नौ दिनों तक चलने वाला पवित्र पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं, घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और मां दुर्गा से सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।
अगर आप जानना चाहते हैं कि शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है, नौ दिनों में किस देवी की पूजा की जाती है और व्रत के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए, तो इस लेख में आपको सभी जरूरी जानकारी विस्तार से मिलेगी।
शारदीय नवरात्रि 2026 की तारीख और महत्वपूर्ण जानकारी
पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 2026 का आरंभ रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को होगा। इस दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के अवसर पर घटस्थापना की जाएगी। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है और दसवें दिन विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है।
| विवरण | तारीख या जानकारी |
|---|---|
| शारदीय नवरात्रि आरंभ | 11 अक्टूबर 2026, रविवार |
| घटस्थापना | 11 अक्टूबर 2026 |
| नवरात्रि का पहला दिन | मां शैलपुत्री की पूजा |
| महाष्टमी और महानवमी | स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि की पुष्टि करें |
| विजयादशमी या दशहरा | 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार |
ध्यान दें कि धार्मिक तिथियां चंद्र पंचांग और सूर्योदय पर आधारित नियमों के अनुसार निर्धारित होती हैं। अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन की तारीख तय करने से पहले अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पंचांग को अवश्य देखें। अलग-अलग शहरों में पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
शारदीय नवरात्रि 2026 में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना करने की परंपरा है। इसे मां दुर्गा का आह्वान करने और नौ दिवसीय पूजा का शुभारंभ करने वाला महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घटस्थापना शुभ समय में और विधि-विधान से करनी चाहिए।
दिल्ली के लिए घटस्थापना का समय
- तारीख: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
- सुबह का संभावित मुहूर्त: सुबह 6:20 बजे से 10:12 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: लगभग सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
ये समय दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग गणना पर आधारित हैं। घटस्थापना का सटीक मुहूर्त शहर, सूर्योदय और पंचांग की गणना के अनुसार बदल सकता है। पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से समय की पुष्टि करें।
घटस्थापना का क्या महत्व है?
घटस्थापना में जल से भरा कलश स्थापित करके उसमें देवी शक्ति का प्रतीकात्मक आह्वान किया जाता है। कलश को शुभता, जीवन, उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ जौ बोने की परंपरा भी प्रचलित है। नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुरों की वृद्धि को कई परिवार शुभता और नई शुरुआत से जोड़कर देखते हैं।
घर में घटस्थापना करने के लिए पूजा स्थान को साफ रखें, आवश्यक सामग्री पहले से तैयार कर लें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें। यदि आप अखंड ज्योति जलाते हैं, तो आग से सुरक्षा और पर्याप्त निगरानी का विशेष ध्यान रखें।
शारदीय नवरात्रि क्या है और इसका महत्व क्या है?
नवरात्रि शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—नव और रात्रि। इसका सामान्य अर्थ है नौ रातें। हिंदू परंपरा में वर्ष के दौरान कई नवरात्रियां आती हैं, जिनमें चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि प्रमुख हैं। शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में शरद ऋतु के आसपास मनाई जाती है।
यह पर्व शक्ति की उपासना का प्रतीक है। धार्मिक कथाओं में मां दुर्गा को महिषासुर का वध करने वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है। महिषासुर अहंकार, अत्याचार और अधर्म का प्रतीक माना जाता है, जबकि देवी दुर्गा शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
नवरात्रि का संदेश केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। यह आत्मसंयम, अनुशासन, सकारात्मक विचार और बुराइयों पर विजय पाने की प्रेरणा भी देता है। बहुत से लोग इन नौ दिनों में अपनी दिनचर्या को अधिक सात्विक बनाते हैं, ध्यान करते हैं, मंत्र जाप करते हैं और जरूरतमंद लोगों की सहायता करते हैं।
नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा क्यों होती है?
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशिष्ट स्वरूप की आराधना की जाती है। इन नौ स्वरूपों को नवदुर्गा कहा जाता है। प्रत्येक स्वरूप के साथ अलग-अलग धार्मिक कथाएं, प्रतीक और आध्यात्मिक संदेश जुड़े हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल, फल, दीपक, धूप, नैवेद्य और मंत्रों के माध्यम से पूजा करते हैं।
इन नौ दिनों में कई मंदिरों में विशेष सजावट, दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन, गरबा और डांडिया जैसे आयोजन होते हैं। पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा बड़े स्तर पर आयोजित की जाती है, जबकि उत्तर भारत में व्रत, रामलीला और दशहरा की परंपराएं विशेष रूप से दिखाई देती हैं।
नवरात्रि के नौ दिन 2026: किस दिन किस देवी की पूजा होगी?
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की क्रमवार पूजा की जाती है। नीचे पूजा के दिन और देवी के नाम दिए गए हैं। जहां तिथियों का स्थानीय निर्धारण अलग हो सकता है, वहां अपने पंचांग से मिलान करना उचित रहेगा।
पहला दिन: मां शैलपुत्री
11 अक्टूबर 2026 को मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। शैलपुत्री का अर्थ पर्वतराज हिमालय की पुत्री है। उन्हें शक्ति, स्थिरता और प्रकृति से जुड़ी देवी माना जाता है। पूजा में फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। भक्त अपने जीवन में धैर्य और दृढ़ता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। यह स्वरूप तपस्या, संयम, साधना और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा को मन की एकाग्रता और आत्मबल से जोड़ा जाता है। इस दिन भक्त मंत्र जाप और ध्यान पर विशेष ध्यान दे सकते हैं।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप साहस, शौर्य और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। भक्त पूजा में लाल या पीले फूल अर्पित कर सकते हैं।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा
14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है। धार्मिक परंपराओं में उन्हें सृष्टि में ऊर्जा और प्रकाश का संचार करने वाली देवी माना जाता है। उनकी पूजा सकारात्मकता, उत्साह और नई शुरुआत का संदेश देती है। इस दिन फल और अपनी परंपरा के अनुसार सात्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। उन्हें भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता के रूप में जाना जाता है। उनका स्वरूप मातृत्व, करुणा, प्रेम और संरक्षण का प्रतीक है। भक्त अपने परिवार की सुख-शांति और बच्चों के मंगल की प्रार्थना करते हैं।
छठा दिन: मां कात्यायनी
16 अक्टूबर को मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें साहस, आत्मविश्वास और अधर्म के विनाश से जोड़ा जाता है। कई भक्त विवाह संबंधी मंगलकामना के लिए भी उनकी पूजा करते हैं। इस दिन श्रद्धा से दुर्गा मंत्रों का जाप और आरती की जा सकती है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि
17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। उनका स्वरूप शक्तिशाली और उग्र है, लेकिन उन्हें अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। कालरात्रि भय, अज्ञान और नकारात्मकता पर विजय का संदेश देती हैं। इस दिन भक्त शांत मन से देवी की आराधना करते हैं।
आठवां दिन: मां महागौरी
मां महागौरी की पूजा अष्टमी के अवसर पर की जाती है। उनका स्वरूप शांति, पवित्रता, करुणा और सौम्यता का प्रतीक है। कई परिवार इस दिन कन्या पूजन करते हैं। वर्ष 2026 में अष्टमी की सही स्थानीय तारीख और कन्या पूजन का समय अपने पंचांग से जांचें, क्योंकि तिथि निर्धारण के नियमों के कारण कैलेंडर में अंतर हो सकता है।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री
मां सिद्धिदात्री नवदुर्गा का नौवां स्वरूप हैं। उन्हें सिद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। नवमी पर कई घरों में हवन, दुर्गा सप्तशती पाठ और कन्या पूजन किया जाता है। पूजा की विधि और समय परिवार की परंपरा के अनुसार तय किया जा सकता है।
ध्यान दें: ऊपर दिए गए दिन देवी-पूजा के क्रम को समझाने के लिए हैं। कुछ वर्षों में तिथियों के क्षय या वृद्धि के कारण नौ दिनों की पूजा का कैलेंडर अलग दिखाई दे सकता है। विशेषकर अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन की तिथि की पुष्टि जरूर करें।
नवरात्रि 2026 की पूजा सामग्री की पूरी सूची
नवरात्रि की पूजा शुरू करने से पहले सामग्री एकत्र कर लेने से पूजा के समय किसी जरूरी वस्तु की कमी नहीं होती। पूजा सामग्री में क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है। सामान्य रूप से निम्नलिखित वस्तुओं की आवश्यकता पड़ती है।
घटस्थापना के लिए सामग्री
- मिट्टी या धातु का साफ कलश
- शुद्ध जल और आवश्यकता के अनुसार गंगाजल
- कलश के लिए आम या अन्य परंपरागत पत्ते
- नारियल और लाल या पीला वस्त्र
- मिट्टी और जौ के बीज
- पूजा की चौकी और लाल कपड़ा
- रोली, कुमकुम, अक्षत और हल्दी
- फूल, माला, धूप, दीपक और रुई की बत्ती
- घी या तेल, माचिस और पूजा की थाली
मां दुर्गा की नियमित पूजा के लिए
- मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर
- चंदन, सिंदूर, रोली और अक्षत
- लाल चुनरी और श्रृंगार की सामग्री
- ताजे फूल, पुष्पमाला और पान-सुपारी, यदि परंपरा में प्रचलित हों
- मौसमी फल और सात्विक भोग
- मिठाई, नारियल और सूखे मेवे
- आरती की थाली और घंटी
- दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या पूजा-पुस्तिका
सामग्री की मात्रा पूजा करने वाले परिवार और अनुष्ठान के प्रकार पर निर्भर करती है। यदि आप पहली बार घटस्थापना कर रहे हैं, तो किसी अनुभवी व्यक्ति से अपनी परंपरा के अनुसार सामग्री की सूची बनवा सकते हैं।
शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?
कलश स्थापना को नवरात्रि के आरंभ का महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इसे साफ-सुथरे पूजा स्थान पर श्रद्धा और सावधानी से किया जाता है। सामान्य पूजा प्रक्रिया इस प्रकार है:
- पूजा स्थान साफ करें: घर के मंदिर या पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। चौकी पर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- स्नान और संकल्प: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। मन में मां दुर्गा की आराधना और व्रत का संकल्प लें।
- जौ बोएं: परंपरा के अनुसार साफ पात्र में मिट्टी डालकर जौ के बीज बोएं। मिट्टी और पानी का संतुलन रखें।
- कलश तैयार करें: कलश को साफ करके उसमें जल भरें। परिवार की परंपरा के अनुसार अक्षत, सुपारी या अन्य पूजन सामग्री डाल सकते हैं।
- कलश सजाएं: कलश के मुख पर पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें, यदि आपकी पूजा पद्धति में यह प्रचलित है।
- कलश स्थापित करें: कलश को तैयार पूजा स्थल पर स्थिरता से रखें। आसपास फूल और अक्षत अर्पित करें।
- देवी का आह्वान करें: मां दुर्गा का ध्यान करें, दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
- मंत्र और आरती: दुर्गा मंत्र, दुर्गा चालीसा या अपनी परंपरा के अनुसार स्तुति करें और आरती करें।
यह सामान्य घरेलू पूजा विधि है। विस्तृत वैदिक अनुष्ठान या विशेष संकल्प के लिए योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन किया जा सकता है।
नवरात्रि में मां दुर्गा के मंत्र
नवरात्रि के दौरान भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हैं। नियमित मंत्र जाप के लिए शांत स्थान चुनें और उच्चारण सहजता से करें।
मां दुर्गा का सरल मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः।
इस मंत्र का जाप भक्त मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए करते हैं। आप अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार कुछ समय तक इसका जाप कर सकते हैं।
सर्वमंगल मांगल्ये मंत्र
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
यह देवी की स्तुति में प्रचलित श्लोक है। भक्त इसे पूजा, ध्यान और आरती के अवसर पर श्रद्धापूर्वक पढ़ते हैं।
मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखना, दूसरों के प्रति सद्भाव रखना और अपने व्यवहार में संयम बनाए रखना भी साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नवरात्रि में व्रत रखने के नियम
नवरात्रि में कुछ भक्त नौ दिनों का व्रत रखते हैं, जबकि कुछ पहले और अंतिम दिन उपवास करते हैं। कई लोग फलाहार करते हैं और कुछ परिवारों में केवल एक समय भोजन करने की परंपरा है। व्रत का तरीका व्यक्ति की आस्था, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
1. सात्विक भोजन करें
व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा या अन्य व्रत में स्वीकार्य भोजन ले सकते हैं। सामान्य भोजन करने वाले लोग भी इन दिनों सात्विक और संतुलित आहार चुन सकते हैं।
2. पूजा और प्रार्थना के लिए समय निकालें
सुबह या शाम अपनी सुविधा के अनुसार पूजा करें। दीपक जलाएं, देवी का ध्यान करें और परिवार के साथ आरती कर सकते हैं। लंबे अनुष्ठान की जगह नियमित और श्रद्धापूर्ण पूजा भी की जा सकती है।
3. स्वच्छता का ध्यान रखें
पूजा स्थल को साफ रखें और पूजा सामग्री को व्यवस्थित रखें। धार्मिक परंपराओं में शारीरिक और मानसिक स्वच्छता को महत्व दिया जाता है।
4. दान और सेवा करें
नवरात्रि में जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक सामग्री देना कई परिवारों की परंपरा है। अपनी क्षमता के अनुसार सेवा और दान करना इस पर्व की भावना के अनुरूप है।
5. स्वास्थ्य का ध्यान रखें
व्रत के दौरान पर्याप्त पानी पिएं और अपनी जरूरत के अनुसार भोजन करें। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों तथा मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को लंबे उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। धार्मिक आस्था के कारण दवाएं बंद न करें और कमजोरी या चक्कर आने पर उपवास जारी रखने के लिए स्वयं को मजबूर न करें।
नवरात्रि में कन्या पूजन कब और कैसे करें?
कन्या पूजन को नवरात्रि की प्रमुख परंपराओं में गिना जाता है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर सम्मान दिया जाता है। कई परिवार अष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं, जबकि अन्य परिवार नवमी के दिन यह अनुष्ठान करते हैं। सही तारीख स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित करनी चाहिए।
कन्या पूजन की सामान्य विधि
- पूजा स्थल को साफ करके मां दुर्गा की आराधना करें।
- आमंत्रित कन्याओं का सम्मानपूर्वक स्वागत करें।
- परंपरा के अनुसार उनके पैर धोएं या प्रतीकात्मक रूप से सम्मान दें।
- तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें।
- पूड़ी, हलवा, चना या परिवार की परंपरा के अनुसार सात्विक भोजन कराएं।
- दक्षिणा या उपहार अपनी क्षमता के अनुसार दें और आशीर्वाद लें।
कन्या पूजन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बच्चों का सम्मान, स्नेह और देखभाल है। किसी भी बच्चे को भोजन या अनुष्ठान के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए।
नवरात्रि के दौरान गरबा, डांडिया और दुर्गा पूजा
शारदीय नवरात्रि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है। गुजरात में गरबा और डांडिया विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। लोग पारंपरिक परिधान पहनकर सामूहिक नृत्य करते हैं और देवी की आराधना करते हैं।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान भव्य पंडाल, देवी दुर्गा की प्रतिमाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक आयोजन होते हैं। उत्तर भारत में मंदिरों में विशेष पूजा, भजन, रामलीला और दशहरे के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दक्षिण भारत में भी गोलू सजाने और देवी के विभिन्न रूपों की पूजा करने की परंपराएं प्रचलित हैं।
इन विविध परंपराओं के बावजूद नवरात्रि का मूल संदेश शक्ति की आराधना, अच्छाई की विजय, सामूहिकता और आध्यात्मिक अनुशासन है। इस अवसर पर परिवार और समुदाय एक साथ आकर उत्सव मनाते हैं।
विजयादशमी 2026 कब है?
शारदीय नवरात्रि के बाद विजयादशमी या दशहरा मनाया जाता है। वर्ष 2026 में विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को निर्धारित है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
रामायण की परंपरा में दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से जुड़ा है। देवी परंपरा में इसे महिषासुर पर मां दुर्गा की विजय के साथ भी जोड़ा जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में रावण दहन, शस्त्र पूजा, मंदिर दर्शन और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से यह दिन मनाया जाता है।
विजयादशमी पर पूजा, शमी पूजन या अन्य पारंपरिक अनुष्ठानों का समय स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार तय किया जा सकता है।
नवरात्रि में क्या करें और किन बातों का ध्यान रखें?
क्या करें?
- पूजा स्थल को स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।
- अपनी परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की नियमित पूजा करें।
- भक्ति गीत, मंत्र जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
- व्रत रखते समय अपने स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखें।
- स्थानीय पंचांग से मुहूर्त और तिथि की पुष्टि करें।
किन बातों का ध्यान रखें?
- पूजा के दौरान जल्दबाजी से बचें और आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखें।
- अखंड ज्योति को ज्वलनशील वस्तुओं से दूर और सुरक्षित स्थान पर रखें।
- स्वास्थ्य खराब होने पर कठोर उपवास न करें।
- धार्मिक परंपराओं को लेकर दूसरों की मान्यताओं का सम्मान करें।
- मुहूर्त, तिथि और व्रत संबंधी जानकारी प्रकाशित या साझा करने से पहले जांचें।
शारदीय नवरात्रि 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू होगी। इस दिन घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
2. नवरात्रि 2026 में घटस्थापना कब होगी?
घटस्थापना 11 अक्टूबर 2026 को होगी। दिल्ली के लिए उपलब्ध गणना में सुबह लगभग 6:20 से 10:12 बजे तक का समय दिया गया है। अपने शहर का सही मुहूर्त स्थानीय पंचांग से जांचें।
3. नवरात्रि 2026 कब समाप्त होगी?
नवरात्रि की नौ दिवसीय पूजा के बाद 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी या दशहरा मनाया जाएगा। अष्टमी और नवमी के अनुष्ठानों की स्थानीय तारीख पंचांग के अनुसार देखें।
4. नवरात्रि में कितनी देवियों की पूजा होती है?
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। इन्हें नवदुर्गा कहा जाता है—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
5. नवरात्रि में घटस्थापना करना जरूरी है?
घटस्थापना नवरात्रि की एक प्रमुख परंपरा है, लेकिन घरों में पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की मान्यताओं के अनुसार अलग हो सकती है। यदि कलश स्थापना संभव न हो, तो अपनी परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की पूजा और प्रार्थना कर सकते हैं।
6. क्या नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखना जरूरी है?
नहीं। व्रत रखने का तरीका व्यक्ति की आस्था, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है। कुछ भक्त पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, कुछ पहले और अंतिम दिन उपवास करते हैं और कुछ बिना उपवास के पूजा-अर्चना करते हैं।
7. नवरात्रि में कन्या पूजन कब करना चाहिए?
कई परिवार अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करते हैं। वर्ष 2026 में कन्या पूजन की सही तारीख और समय तय करने के लिए अपने स्थानीय पंचांग का अनुसरण करें।
8. शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में क्या अंतर है?
चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में चैत्र मास के दौरान आती है, जबकि शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में शरद ऋतु के आसपास मनाई जाती है। दोनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है।
9. नवरात्रि के दौरान क्या खाना चाहिए?
यह व्रत की परंपरा पर निर्भर करता है। व्रत रखने वाले लोग फल, दूध और अपनी परंपरा में स्वीकार्य अन्य खाद्य पदार्थ ले सकते हैं। पर्याप्त पानी और संतुलित पोषण का ध्यान रखना चाहिए।
10. दशहरा 2026 किस दिन है?
वर्ष 2026 में दशहरा या विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा।
निष्कर्ष
शारदीय नवरात्रि 2026 मां दुर्गा की आराधना, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवन की प्रेरणा देने वाला पवित्र पर्व है। यह 11 अक्टूबर से शुरू होगी और इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। नवरात्रि के दौरान भक्त नौ देवियों की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, मंत्र जाप करते हैं और कन्या पूजन जैसे अनुष्ठान करते हैं।
यदि आप नवरात्रि की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा सामग्री पहले से जुटा लें और घटस्थापना का समय अपने शहर के पंचांग से जांच लें। व्रत के दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें। मां दुर्गा की आराधना का संदेश साहस, करुणा, संयम और अधर्म पर धर्म की विजय है।
आप सभी को शारदीय नवरात्रि 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं। जय माता दी!



